Thursday, 8 December 2011

अजनबी

उस रोज वह शांत था
हर रोज की तरह उस गली
से गुजरा था.....
ना जाने क्या हुआ था उसे
खुशी बिखेर ने वाला शांत था
न  जाने क्यों ........
कुछ तो कमी थी
कुछ तो बुरा हुआ था....
वो लम्हा याद रहेगा
क्यों की उस के बाद
वो ना दिखा........... 

Sunday, 4 December 2011


पुरे होते नहीं खाब सोचने से
कुछ कर दिखने की आस भी है 
किस की तलाश है जिंदगी को
                                           मालूम नहीं प्यास किस चीज़ की है.......

Saturday, 3 December 2011

मंजिले सफ़र की तलास में 
कल उस की याद मै वो लम्हा याद आया
और उस की याद ने कुछ इस तरह से 
मुझे सोचने मै मजबूर कर दिया..
क्या ये ही था अपना कल,
जिस की तलास मैंने की थी, 

 
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