उस रोज वह शांत था
हर रोज की तरह उस गली
से गुजरा था.....
ना जाने क्या हुआ था उसे
खुशी बिखेर ने वाला शांत था
न जाने क्यों ........
कुछ तो कमी थी
कुछ तो बुरा हुआ था....
वो लम्हा याद रहेगा
क्यों की उस के बाद
वो ना दिखा...........
Sunday, 4 December 2011
पुरे होते नहीं खाब सोचने से कुछ कर दिखने की आस भी है किस की तलाश है जिंदगी को